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Pregnancy Week क्या होते है? और कैसे चेक करें

 महिला के प्रेग्नेंट होने के लक्षण का पता लगने पर डॉक्टर द्वारा जांच करवाई जाती है जिसके अंदर डॉक्टर द्वारा बताया जाता है कि प्रेग्नेंट हुए महिला को कितना समय हो गया है या कितना विक हो चुके हैं। इसमें महिला के प्रेगनेंसी के 10 सप्ताह बाद में यह प्रक्रिया शुरू की जाती है। 10 सप्ताह के अंदर बच्चे की आकार और हरकतों को देखते हुए पता लगाया जाता है कि  बच्चे कि वीक  में चल रहा है।

Pregnancy week कैसे चेक करें। | pregnancy test Kaise Hota hai

महिला को अपने मां बनने पर खुशी मिलती है। महिलाओं द्वारा अपने प्रेग्नेंट होने से लेकर बच्चे की जन्म तक का समय कुछ सप्ताह द्वारा पता किया जाता है इन सप्ताहों से महिला के प्रेग्नेंट होने से लेकर डिलीवरी होने तक का समय पता लगा लिया जाता है इसमें पता चलता है कि महिला की डिलीवरी कब तक हो सकती है। प्रेग्नेंट के दौरान 40 सप्ताह का प्रेगनेंसी वीक माना जाता है इसमें ऐस्टीमेटेड डेट ऑफ कन्फाइनमेंट का कैलकुलेशन किया जाता है। इसमें 280 दिन का अंतिम आखिरी मासिक धर्म की तारीख जुड़ी होती है। इसमें डॉक्टर द्वारा बता दिया जाता है कि बच्चा किस तारीख के आसपास पैदा होगा। इसके लिए डॉक्टर द्वारा कुछ परीक्षण किए जाते है।

प्रेगनेंसी के कितने सप्ताह होता है

डॉक्टरों द्वारा बताया गया है कि एक प्रेग्नेंट महिला अपने बच्चे को जन्म 40 सप्ताह के बात या उसके अंदर दे सकती है। यह तारीख की गणना तय की जाती है हालांकि कोई भी बच्चा यदि मां के गर्भ में 39 सप्ताह तक रहता है तो उससे पहले वाले सप्ताह को पूर्ण विकसित कहां जा सकता है डिलीवरी 39 सप्ताह और 41 सप्ताह के बीच कभी हो सकती है। इसलिए डॉक्टर द्वारा 40 सप्ताह को प्रेगनेंसी वीक माने जाते हैं।

प्रेगनेंसी के इन शब्दों को तिमाही में बांटा जाता है यानी कि 40 सप्ताह को तीन भागों में विभाजित कर जाता है।

प्रेगनेंसी में तिमाही क्या है?

प्रेगनेंसी की पूरी अवधि प्रेग्नेंट होने से लेकर बच्चे के जन्म तक को 40 सप्ताह में गिना जाता है। यह 40 सप्ताह को तीन भागों में भाग जाता है जैसे तिमाही कहते हैं प्रेगनेंसी में 1 से 3 महीने पहली तिमाही होती है 4 से 8 महीने दूसरी तिमाही होती है 7 से 9 महीने में प्रेगनेंसी की तीसरी में होती है। इन तीनों तिमाहियों में मां और बच्चों का खास ध्यान रखा जाता है हर एक तिमाही में अलग-अलग परिवर्तन होते रहते हैं। तीसरी तिमाही में महिला और बच्चे का बहुत ध्यान रखा जाता है क्योंकि यह लास्ट सप्ताह होता है जिसमें बच्चे का जन्म होना होता है।

Pregnancy week  मे क्या होता है

Pregnancy week  काउंट करने का तरीका महिलाओं के तिमाही से पता चल जाता है जैसे जैसे महिला की वीक आगे बढ़ते हैं उनके अंदर बच्चे का विकास होता है। इन तीनों तिमाही मे पूरा प्रोसैस होता है चलये जानते है: 

पहली तिमाही

पहली तिमाही यानी कि 1 सप्ताह से 13 सप्ताह के बीच की होती है इस वीक के दौरान महिला के अंदर कंसीव जैसी हरकत होती है। 13 सप्ताह में  1 से 4 सप्ताह तक महिला गर्भवती होती है 5 सप्ताह से 8 सप्ताह तक महिला के गर्भ में बच्चे की दिल की धड़कन शुरू होती है 9 से 13 सप्ताह के अंदर बच्चे की अंग की संरचना बढ़ने लगती है।

दूसरी तिमाही

प्रेगनेंसी महिला की दूसरी तिमाही  14 सप्ताह से 26 सप्ताह तक की होती है इस दौरान 14 से 17 सप्ताह के बीच बच्चे का लिंग का विकास होता है 18 सप्ताह से 21 सप्ताह के बीच बेबी केक मारना शुरू कर देता है और 22 सप्ताह से 26 सप्ताह के बीच हाथ की प्रक्रिया शुरू होती है।

तीसरी तिमाही

प्रेगनेंसी महिला के तीसरी तिमाही के अंदर 27 वीक से 40 वीक जोड़े जाते हैं इसके अंदर 27 वीक से 30 फीट तक भ्रूण में सांस लेने की क्षमता आ जाती है और 31 सप्ताह से 35 सप्ताह तक नाखून पूरी तरह बन जाते हैं फिर 36 से 40 सप्ताह के बीच बच्चे की डिलीवरी होने की संभावना रहती है।

इन तिमाही के अंदर महिला डॉक्टर को दिखा कर प्रेगनेंसी वीक का पता लगाया जा सकता है। इसके लिए डॉक्टर द्वारा कुछ टेस्ट किए जाते है। आज कल कम्प्युटर के सिस्टम से बच्चे का पूरा पता लगा जा सकता है।

प्रेगनेंसी के वीक कैसे काउंट किया जाता है? | kaise pata kare pregnancy kitne din ki hai

अक्सर प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाएं घर पर ही प्रेगनेंसी के वीक निर्धारित कर लेती है। कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के वीक काउंट करने के लिए डॉक्टर की मदद लेती है इसमें पता लगाया जाता है कि महिला प्रेग्नेंट कब हुई और बच्चा कब होना है चलिए जानते हैं कैसे प्रेगनेंसी वीक  काउंट की जाती है।

महिला अपने प्रेगनेंसी के सटीक सप्ताह की गणना कुछ ऐसी है जो महिला को बहुत मुश्किल होती है जैसा कि प्रेगनेंसी के 10 सप्ताह के बीच में आपको डॉक्टर यह बता सकता है कि 9 सप्ताह की गर्भवती हैं या 10 सप्ताह की है यह माइलस्टोन प्रेगनेंसी के 10 सप्ताह से मेल खाते हैं इनकी गणित यानी की गणना करना काफी कंफ्यूजन पैदा कर सकता है।

महिला के pregnancy week 9 सप्ताह या 10 सप्ताह के बाद डॉक्टर बताता है कि बच्चे का डिलीवरी कब आना है। इसे पहले तिमाही दूसरी तिमाही और तीसरी तिमाही के आधार पर देखिए जाता है महिला के 13 सप्ताह तक पहले से तिमाही के अंदर पता चलता है कि बच्चे का जन्म तीसरी तिमाही के कौन से वीक में होगा।

पढ़े घर पर गर्भावस्था (Pregnancy) का परीक्षण कैसे करें

डॉक्टर द्वारा प्रेगनेंसी वीक काउंट करना

Pregnancy week कि गणना करने के लिए आखरी पीरियड्स को ध्यान में रखा जाता है। डॉक्टर कभी-कभी वास्तविक भ्रूण की उम्र पता करने के लिए वैकल्पिक माध्यम से प्रेगनेंसी का पता लगा लेते हैं।

यह महिलाओं के लिए विशेष रुप से कारगर होती है जिनका मासिक धर्म यानी कि पीरियड्स का कोई समय निश्चित नहीं होता उन्हें अपने लास्ट पीरियड्स की तारीख याद नहीं होती है इसके लिए डॉक्टर द्वारा प्रेगनेंसी वीक अकाउंट करने के लिए 2 तरीके काम में लेता है चलिए जानते हैं।

Body test

डॉक्टर ज्यादातर गर्भाशय के आकार को चेक करता है और मां की बॉडी का चेकअप करता है। खासतौर से पहली तिमाही में यह उन प्रेगनेंसी के वीक के बारे में सही जानकारी देता है। इसे पता लगा जाता है कि फंटूश और प्यूबिक बोन के बीच की दूरी प्रेगनेंसी के पहले कुछ हफ्तों में अलग है या नहीं। डॉक्टर इस्मार्ट का उपयोग इसलिए करता है ताकि भ्रूण की उम्र का एक अनुमान लगाया जा सके।

अल्ट्रासाउंड से

डॉक्टर द्वारा प्रेगनेंसी वीक का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड तरंगों का उपयोग किया जाता है इसके अंदर भ्रूण के अंदर की छवि का डॉक्टर पता लगाता है फोन के अंदर की छवि डॉक्टर द्वारा कंप्यूटराइज्ड द्वारा दिखाया जाता है इसमें प्रेगनेंसी के वीक की संख्या तय कर सकते हैं। यह प्रक्रिया सिर से लिंग तक पैरों की उंगलियों से सिर की दूरी और एमनीओटिक थैली का साइज बताती है इसमें बच्चे की उम्र को निर्धारित किया जाता है। इस प्रक्रिया से भ्रूण में बच्चे की आयु सही ढंग से में जारी की जा सकती है। अल्ट्रासाउंड  के इस तरीके से भ्रूण के अंदर बच्चे की संरचना को बाहर देखकर पता लगाया जा सकता है कि कौनसा वीक चल रहा है।

ऐसे करे पता प्रेगनेंसी वीक का | kaise pata kare pregnancy ka weeks

बच्चे की धड़कन

डॉक्टर द्वारा बच्चे की धड़कन से पता लगाया जा सकता है की प्रेगनेंसी का कौन सा वीक है बच्चे की धड़कन से मालूम चलता है कि बच्चा 5 से 8 सप्ताह के बीच में है। 5 से 8 सप्ताह के बीच बच्चे की धड़कन शुरू हो जाती है।

अंग संरचना

Ultrasound तरीके से बच्चे के अंग और संरचना बनने से डॉक्टर द्वारा पता लगाया जाता है कि बच्चा 9 सप्ताह से 13 सप्ताह के बीच में है। बच्चे के अंग बनने की प्रक्रिया 9 सप्ताह से 13 सप्ताह के बीच में होती है यह पहली तिमाही का भाग है।

बच्चे के लिंग विकसित होने से

डॉक्टर द्वारा अल्ट्रासाउंड परीक्षण करके देखा जाता है कि यदि बच्चे का लिंग का विकास हो रहा है तो बच्चा दूसरी तिमाही के अंदर है लिंग का विकास 14 सप्ताह से 17 सप्ताह के बीच में होता है। इस तरीके से हम दूसरी तिमाही के प्रथम चरण का पता लगा सकते हैं।

बेबी का किक मारना

बेबी का किक मारना यानी कि प्रेगनेंसी के वीक का बता चलता है बच्चा 18 से 21 सप्ताह के बीच मैं किक मारना शुरू कर देता है।

हाथ की प्रक्रिया

जब डॉक्टर द्वारा चेक किया जाता है तब अल्ट्रासाउंड से आने वाली छवि में बच्चे के हाथों की रिफ्लेक्शन से पता चलता है कि बच्चे का तीसरा दिन है शुरू होने जा रहा है। हाथ का रिफ्लेक्शन 22 से 26 सप्ताह के बीच में होता है।

भ्रूण में सांस लेने की क्षमता

भंवर में सांस लेने की क्षमता अक्सर 27 से 30 सप्ताह के बीच में होना शुरू हो जाती है इसके बाद में बच्चे का नाखून बनना शुरू हो जाता है नाखून बना 31 सप्ताह से 35 सप्ताह के बीच में होता है उसके बाद में डिलीवरी का समय नजदीक आ जाता है यह तीसरी तिमाही का भाग है।

डॉक्टर द्वारा अल्ट्रासाउंड तरंगों से बच्चे के संपूर्ण विकास और हरकतों को ध्यान में रखते हुए प्रेगनेंसी का एक सही अनुमान लगाया जा सकता है। क्योंकि भ्रूण में होने वाले विकास का पता एक अनुमान के थ्रू नहीं लगाया जा सकता है इसके लिए एक स्पेसिफिक तरीका अपना जाता है जो डॉक्टर द्वारा ही किया जाता है।


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